Motivational Story In Hindi हिंदी में प्रेरक कहानियाँ 2020

motivational story in hindi

Motivational Story 1 – अकबर और बीरबल की कहानी

एक बार की बात है, दरबार लगा हुआ था। महाराज अकबर अपनी राजगद्दी पर आराम से बैठे थे। तभी अकबर के दरबार में एक व्यक्ति आया जोकि बहुत निराश था। उसने आते ही बादशाह सलामत से कहा – “मुझे फांसी दे दी जाए” । यह सुनकर पूरा दरबार चौंक गया। सब व्यक्ति एक दूसरे का मुंह देख रहे थे और बादशाह सलामत भी यह बात सुनकर हैरान थे कि इस व्यक्ति ने ऐसा क्यों कहा। तो बीरबल ने कहा – “क्या हुआ ? आप ऐसा क्यों कह रहे हो”

तो इस बार उस व्यक्ति ने कहा कि ” मैं अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाया, मैंने बहुत प्रयास करें पर मैं सफल नहीं हो पाया।” लोग मुझे बोलते हैं कि – “तू कुछ नहीं कर सकता, तेरे बस की नहीं है।” इस पर अकबर ने कहा कि ” हमारी सल्तनत में ऐसा हो रहा है और हमें पता ही नहीं। ” अकबर गुस्सा हो जाते है और अपने कक्ष की तरफ जाने लगते है।

इस पर बीरबल कहते हैं कि ” महाराज कहीं जाने की जरूरत नहीं है। यह तो बहुत छोटी सी परेशानी है। ” इस पर वह दुखी व्यक्ति ओर नाराज हो जाता है और कहता है ” देखिए महाराज मैं आपके दरबार में अपनी परेशानी लेकर आया। तो मुझे यहां पर भी बोला जा रहा है कि छोटी से परेशानी है पर मेरी हिम्मत नहीं है कि मैं लोगों को और ज्यादा सहन कर पाऊं। इसलिए मुझे फांसी दे दी जाए। मैं अपने जीवन से मुक्ति पाना चाहता हूं। मैं मरना चाहता हूं, मैं हार गया हूं। फांसी नहीं तो मुझे कारावास में ही डाल दो। “

तो बीरबल कहता है – “ठीक है, आप की इच्छा को पूरा करने से पहले आपको हमारे लिए एक कार्य करना पड़ेगा। ” तो बीरबल खजाने से एक बड़ा सा रूबी मंगवाते है, जिसे अब तक तराशा नहीं गया था। वह दिखने में बहुत गंदा सा लग रहा था पर वह हल्का फुल्का चमक भी रहा था। उस व्यक्ति को समझ नहीं आया कि वह क्या चीज है और बीरबल ने उनसे कहा कि “आपको इसे बेचना नहीं है बस, आप इसको लेकर जाइए और और इसकी कीमत का पता लगा कर आए। “

तो वह व्यक्ति जाता है और सबसे पहले सब्जी विक्रेता को दिखाता है और कहता है – ” आप इस लाल पत्थर की मुझे क्या कीमत दे सकते हो ? तो सब्जी वाले ने कहा कि ” मैं इसके बदले तुम्हें 2 किलो आलू दे सकता हूं। ” तो व्यक्ति ने कहा ” ठीक है मगर मुझे अभी इसको बेचना नहीं है ” और वह आगे चले जाता है अब वह एक फल वाले की दुकान में जाता है और उसको पत्थर दिखाता है और बोलता है – ” इसके बदले तुम मुझे क्या दे सकते हो ? तो फल विक्रेता उस पत्थर को देखता है और कहता है ” यह पत्थर तो चमक रहा है। इसके बदले मैं तुम्हे बहुत सारे फल दे दूंगा। ” पर वह कहता है ” नहीं, मुझ बेचना नहीं है ” और वह आगे चले आता है।

आगे चलकर वह एक साहूकार के पास जाता है और साहूकार को वह पत्थर दिखाता है। साहूकार उसे कहता है कि ” इसके बदले मैं तुझे दस सोने के सिक्के दे दूंगा ” तभी व्यक्ति बोलता है कि ” ठीक है मगर मुझे इसे बेचना नहीं है ” और वह आगे चले जाता है। इसके बाद वह सुनार की दुकान में जाता है और सुनार को वह पत्थर दिखाता है और कहता है कि इसके बदले में तुम मुझे क्या दोगे ?

तो सुनार उसे देखता है और उसे वह बहुत पसंद आता है। वह कहता है ” इतनी चमकने वाली रूबी तुम्हारे पास आई कहां से ?व्यक्ति कहता है कि आप मुझे इसके बदले में क्या दे सकते हैं? तो इस पर सुनार कहता है कि ” मैं आपको एक सोने का आभूषण दे दूंगा। ” तो व्यक्ति कहता है कि ” नहीं, मुझे नहीं बेचना ” और वह आगे चले जाता है।

अब वह हीरो के बहुत बड़े व्यापारी के पास जाता है और उसे वह दिखाता है। हीरो का व्यापारी उसे एक झटके में पहचान लेता है कि वह बेशकीमती रूबी है है और वह तुरंत एक चादर पर उस पत्थर को रखता है और माथा टेकता है। व्यक्ति को समझ नहीं आता कि वह ऐसा क्यों कर रहा है ? तो हीरो का व्यापारी कहता है कि ” मैं तुम्हें अपनी पूरी संपत्ति भी दे दूं तो वह भी कम पड़ेगी। “

इस पर व्यक्ति कहता है कि मुझे बेचना नहीं है और वह पत्थर लेकर बहुत तेजी से महल की तरह भागता है। उसके दिमाग में बहुत सारे प्रश्न होते हैं जो वह दरबार में आते ही पूछना चालू करता है। यह क्या चीज है ? इसके कोई मुझे 2 किलो आलू दे रहा है तो, कोई दस सोने के सिक्के तो, कोई कह रहा है कि इसके लिए पूरी संपत्ति कम पड़ जाएगी।

तो बीरबल कहते हैं कि ” यह एक हीरा है जिसको रूबी कहा जाता है और इसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि तुम अपनी सारी जिंदगी में भी इससे कमाई दौलत खर्च नहीं कर सकते। यह पूरी दुनिया को 6 महीने तक भरपेट खाना दे सकता है । यह सुनके व्यक्ति के होश उड़ गए।

बीरबल कहते हैं कि जैसे इस पत्थर का सबने अलग-अलग मूल्य बोला क्योंकि वह इसकी कीमत नहीं जानते थे। इसी प्रकार से सभी लोगों का नजरिया इस पत्थर को देखने का अलग अलग था। जिस वजह से आपको अलग-अलग कीमत बताई गई। उसी प्रकार से लोगों का देखने का नजरिया भी अलग होता है जिस वजह से वह कई बार सामने वाले इंसान को कम आँकते हैं और हम उनके हिसाब से खुद को कमजोर या हारा हुआ समझने लगते हैं।

सभी लोगों का सोचने का तरीका अलग है। सब लोग एक जैसा नहीं सोच सकते है इसीलिए हमें अपनी कीमत पता होनी चाहिए क्योंकि यह हमारी जिंदगी है और इसे हमें अपने हिसाब से जीनी है, ना कि लोगों के हिसाब से। उस व्यक्ति को यह बात समझ में आ जाती है और वह मरने का विचार त्याग देता है और फिर से एक नई शुरुआत के लिए चल देता है तभी महाराज उस व्यक्ति को अपनी सेना में शामिल करने का प्रस्ताव रखते हैं और उसे अपनी सेना में शामिल कर लेते हैं

सीख – इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हम सभी ऐसे लोगों से जरूर टकराते हैं जो कहते हैं, तू कर नहीं सकता या तेरे बस की नहीं है और हम उनकी बात को मान लेते हैं। सभी लोगों का नजरिया अलग है परंतु जिंदगी हमारी है जो हमें अपने हिसाब से जीनी है। Viewers आप सभी एक अनमोल हीरे हैं।

Motivational Story 2 – अकबर और बीरबल की कहानी

एक बार की बात है, सभा खत्म होने के बाद अकबर और बीरबल अपने महल के बगीचे में घूम रहे होते हैं। दोनों में एक बात को लेकर विचार विमर्श चल रहा होता है। तो बीरबल कहते है कि ” महाराज हमें अपनी सेना को युद्ध का अभ्यास करते रहने के लिए बोलना चाहिए। उनको इतना आराम देना भी हानिकारक हो सकता है।

बीरबल की यह बात सुनकर अकबर कहते हैं – “नहीं बीरबल, तुम गलत सोच रहे हो।आराम भला हानिकारक कैसे हो सकते हैं ? हमारी सेना इतनी शक्तिशाली हैं कोई हमसे युद्ध करने से पहले हज़ार बार सोचेगा।

राजा अकबर का जवाब सुनकर बीरबल को एक किस्सा याद आता है और वे महाराज को सुनाना आरम्भ करते हैं कि महाराज बहुत समय पहले की बात है। एक साहूकार के पास बहुत संपत्ति थी। वह हर तरह का ऐशो आराम कर सकता था परंतु वह दिन रात मेहनत करता था ताकि अपने कल को आज से बेहतर बना सकें।

इतना पैसा होने के बाद भी साहूकार कभी पैसों के बारे में नहीं सोचता था और वह रोजाना अपना कार्य पूरी मेहनत और लगन के साथ कर रहा था परंतु एक बात साहूकार को बहुत बेचैन करती थी कि उसके पुत्रों में काम को लेकर अधिक इच्छा नहीं थी और वे सभी पुत्र पैसों के लोभ में आलसी हो रखे थे। वह अपना ज्यादातर समय आराम करने में ही बिता दिया करते थे।

अधिक धन होने की वजह से एक अच्छी खासी जिंदगी जी रहे थे। पर यह बात साहूकार को बहुत विचलित करती थी क्योंकि साहूकार ने बहुत मेहनत से पैसा अर्जित किया था परंतु उसके पुत्र उन पैसों को बर्बाद कर रहे थे और उसे डर था कि यदि भविष्य में कोई विपदा आ गई तो मेरे पुत्र उस विपदा से कैसे सामना करेंगे। क्योंकि उन्होंने कभी बुरे दिन देखे ही नहीं, कभी परेशानी अनुभव की ही नहीं।

साहूकार ने यह बात अपने पुत्रों के आगे रखी कि आप सभी को समय के रहते काम को सीख लेना चाहिए और अपने आप को बेहतर बनाना चाहिए। इस पर साहूकार के पुत्रों ने कहा कि ठीक है, पर किसी भी पुत्र का काम करने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी। पर किसी तरीके से वह चारों पिताजी के साथ जाते। अब कुछ टाइम बीता पर चारों में से किसी को भी काम समझ नहीं आया।

जब तक साहूकार काम कर रहा था, वह काम बहुत अच्छा चल रहा था। पर धीरे धीरे साहूकार की उम्र होने लगी और उसने काम पर जाना कम कर दिया क्योंकि वह बूढ़ा हो चला था। उसे आराम की जरूरत थी। साहूकार के ना होने पर पुत्रों ने फिर से पहले जैसे जिंदगी को जीना आरंभ कर दिया जिस कारण काम में घाटा आना शुरू हो गया।

शुरू में यह बहुत मामूली लगा परंतु धीरे धीरे यह बढ़ता चला गया और पुत्रों ने पिताजी को इसकी खबर नहीं लगने दी और आसपास से पैसा ब्याज पर उठाकर घाटा संभाल लिया। ऐसे ही कई बार किया परंतु घाटा बढ़ते ही जा रहा था। जिस कारण उन्होंने इस बार अधिक धन ब्याज पर ले लिया और वह चुका नहीं पाए।

पैसे वापस चुकाने के लिए साहूकार को संपत्ति बेचनी पड़ी। इस सदमे से साहूकार की मृत्यु हो गई और चारों पुत्रों की दशा बहुत ज्यादा खराब हो गई। अब वे पहले जैसी जिंदगी जीने के लिए तरस गए। उन्हें अब अपने पापा की कही बात समझ आ रही थी।

सीख – दोस्तों इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि कोई भी समय अच्छा हो या बुरा वह हमेशा के लिए नहीं होता इसलिए हमें अपने बुरे समय के लिए व्यवस्था करके चलना चाहिए और साथ ही हमें अपनी जिंदगी में नए चैलेंज को accept करना चाहिए और दिन प्रतिदिन अपनी जिंदगी को बेहतर बनाना चाहिए।

Motivational Story 3 – बिज़नेसमेन और उनके बेटे की कहानी

एक बार की बात है, एक बहुत बड़े बिजनेसमैन थे। उनके दो बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की। दोनों अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके थे। लड़की बड़ी थी, इस वजह से उसका अच्छा सा रिश्ता ढूंढ कर उसकी शादी कर दी गई और लड़के से पूछा क्या कि ” तुम आगे क्या करना चाहते हो तो लड़के ने बोला कि पापा अभी तो मुझे अपनी जिंदगी को जीना है, मौज करनी है, मस्ती करनी है और कहीं सारी जगहो पर घूम के भी आना है। ” यह बात पिताजी को थोड़ी अजीब लगी।

उसके पिता ने कहा कि ” बेटा, यह सब तो आप करते रहोगे मगर आप काम क्या करना चाहते हो ? अब हमें अपने बिजनेस को बड़ा करना है तो आप इस बिज़नेस को समझो, इसमें दिमाग लगाओ। लड़के ने कहा – ” ठीक है, हाँ ओके ” करके इस बात को टाल दिया परंतु पिताजी ने उस वक्त तो कुछ नहीं कहा और वह चुपचाप अपने पुत्र को और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य पर नजर रखने लग गए। उनका पुत्र सिर्फ पैसे इधर – उधर खर्च कर रहा था। उसका सही उपयोग नहीं कर रहा था। तो पिताजी को एक तरकीब सूझी।

उन्होंने अपने पुत्र को बुलाया और कहा कि शाम तक मुझे अपनी कमाई से कुछ रुपए लाकर दे वरना आज तुम्हारा घर में आना बंद। इस बात का बहुत बुरा लगा कि पहली बार पिताजी ने ऐसा कुछ बोला। तो लड़के ने सारी बात जाकर अपनी मम्मी को बताई। मम्मी ने कहा – ” ले बेटा सोने का सिक्का और यह जाकर अपने पिताजी को शाम में दे देना। ” उसके पिताजी काम से आए तो पूछा कि ” बेटा, आज क्या कमाया ? तो बेटे ने मम्मी से लिया सोने का सिक्का लाकर पिताजी को दे दिया। पिताजी समझ गए कि मम्मी ने मदद की है।

उन्होंने अपने बेटे से कहा कि बेटे अब इसे लेकर जाओ और बाहर जो कुआं है, उसमें जाकर फेंक दो। लड़के ने ऐसा ही किया। वह बाहर गया और सिक्के को फेंक दिया। अब पिताजी ने अगली सुबह मम्मी को किसी बहाने से मायके भेज दिया और बेटे को बोला कि शाम तक अपनी कमाई से कुछ लेकर आओ और मुझे दिखाओ वरना तुम्हारा घर में रहना बंद। ” अब लड़के को कुछ समझ नहीं आ रहा था। मां के पास भी नहीं जा सकता था क्योंकि मां को मायके भेज दिया गया था।

अब लड़का दीदी के पास गया और सारी बात बता दी तो दीदी ने भी उसे ₹500 दे दिए। पिताजी फिर शाम को आए। उन्होंने लड़के को बुलाया और और पूछा कि आज क्या कमाया ? लड़के ने ₹500 पापा को दे दिए। पिताजी ने फिर वही बात कही कि जाओ इसको कुएं में फेंक आओ। लड़का गया और कुँए में पैसे फेंक कर आ गया। पिताजी समझ गए कि किसने मदद की है और उन्होंने अगले दिन अपनी पुत्री को घर भेज दिया और अगली सुबह लड़के से फिर यही बोला गया कि ” बेटा आज तुम्हें फिर कुछ कमा कर लाना है वरना तुम्हारा घर में रहना बंद।”

अब लड़का मार्केट में नौकरी ढूँढने निकला। वह बहुत सारी जगह घूमा। बहुत मुश्किल से एक ट्रक वाले ने उसे नौकरी दी और उसको बोला कि ” यह सारी बोरियां उतार के अंदर कारखाने में रखनी है। ” लड़के ने कहा – ” ठीक है। उसे उस कार्य को करने में 5 घंटे लगे। उसके बाद जब वह सारी बोरिया उतार कर अंदर कारखाने में रख देता है। तो वह कारखाने के मालिक पर गया और मालिक ने ₹100 दिए और बोला – ” इस से ज्यादा नहीं मिलेंगे।इतने ही मिलेंगे। ” वह घर आ गया।

उसने पहली बार काम किया था। जिस कारण उसके हाथ पैर बहुत दर्द हो रहे थे। शाम को उसके पिताजी घर आये और अपने बेटे को बुलाकर वही सवाल पूछा कि आज क्या कमाया ? तो उसने ₹100 निकाल कर दिए। पिताजी ने वही कहा कि – ” जाओ और इसको कुएं में फेंक आओ। ” इस बार यह सुनकर लड़के को गुस्सा आ गया और उसने बोला कि मैंने सारा दिन काम करके पैसे कमाए है।

मेरे हाथ – पैर में दर्द हो रहे हैं और आप कह रहे हो कि मैं अपनी मेहनत की कमाई को कुएं में फेंक दूँ। आप चाहते क्या हो ? इस पर पिताजी ने बोला कि ” बेटा मैं भी ऐसे ही दिन रात मेहनत करता हूं और तुम उस मेहनत की कमाई को ऐसे ही बर्बाद करते हो। मैं तुम्हें समझाना चाहता था कि पैसे की कीमत को समझो और उसे सही जगह उपयोग करो।

सीख – इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि पैसों की हमेशा कद्र करो। अपने माता-पिता द्वारा कमाए धन को बर्बाद न करे।

Motivational Story 4 – बास्केटबॉल प्लेयर की सच्ची कहानी

एक गरीब परिवार था। उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत संघर्ष किया था। उनका हर दिन एक नई चैलेंज के साथ शुरू होता था। बहुत गरीब होने के कारण कई बार भरपेट खाना भी नहीं खा पाते थे। उनके पिता ने अपने बेटे को बुलाया और बेटे से बोला कि ” बेटा यह जो तुम्हें टी-शर्ट दिख रही है पुरानी – सी टंगी हुई, इसकी कीमत क्या होगी ?

तो बेटे ने जवाब दिया – ” पापा यह $1 की होगी। उनके पिता ने कहा कि आपको ये टी-शर्ट $2 में बेच कर आनी है। घर के हालात देखकर उन्होंने मना नहीं किया और सोचा कि क्या किया जाए पर टी-शर्ट की हालत देखकर लग नहीं रहा था कि वह $2 में कोई खरीद लेगा। फिर उन्होंने किसी तरीके से उसे कपड़ों के नीचे दबाकर रखा जिससे कि टी-शर्ट पर जो सिलवटे थी वह समाप्त हो गयी।

और फिर वह टी-शर्ट को लेकर स्टेशन चले गए। भीड़ होने की वजह से वहाँ काफी लोग आ जा रहे थे तो शाम तक उन्ही में से किसी एक शख्स ने वो टी-शर्ट $2 में खरीद ली। वह घर आए और अपने पिताजी को जाकर $2 दे दिए और फिर उनके पापा ने उन्हें एक और टी-शर्ट निकाल कर दी और कहा कि इसको तुम्हें $20 में बेचना है। यह सुनकर लड़के ने फिर दिमाग लगाया और सोचा कि कैसे $20 में इसे बेचा जाए?

तभी उन्हें याद आया कि उनके पास एक पुराना मिकी माउस का logo रखा हुआ है। तो उन्होंने उस मिकी माउस के logo को टीशर्ट में लगा दिया और अगले दिन वह टी शर्ट लेकर स्कूल के बाहर जाकर खड़े हो गया, जहां पर अमीर घर के बच्चे पढ़ते थे। उसी में से एक बच्चे को मिकी माउस वाली टी-शर्ट पसंद आ गई और उसने अपने पापा से जिद करी कि पापा मुझे यह मिकी माउस वाली टी शर्ट खरीद कर दो।

तो उसके पापा ने उसकी ज़िद मान ली और उस छोटे से बच्चे से वो टीशर्ट $20 में खरीद ली और उसके बाद उनको $5 extra टिप भी दी क्योंकि उस टी-शर्ट पर उसे छोटे से बच्चे की क्रिएटिविटी पसंद आई। अब वह घर आ गए और अपने पिताजी को $25 दे दिए। अब उनके पिताजी ने एक और पुरानी सी टी-शर्ट निकाली है और कहा कि तुम इसे $200 में कल बेच कर आना और मुझे विश्वास है कि तुम ऐसा कर पाओगे।

फिर से वही situation आ गई। घर के हालात देखे, अब उन्होंने रात भर अपना खूब दिमाग लगाया और सोचा कि क्या करुँ ? अगले दिन घर से निकल गए , रास्ते में उन्हें एक होल्डिंग देखा। जिस पर एक फेमस एक्ट्रेस का फोटो लगा हुआ था जोकि एक शो के लिए आने वाली थी। जब वह आई तो वह छोटा सा बच्चा इवेंट में घुस गया और धीरे-धीरे आगे चला गया और फिर बाकी लोगो की तरह वह भी चिल्ला रहे थे कि मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं, बहुत बड़ा फैन हूं।

तो उस एक्ट्रेस ने उनको देखा और ऊपर बुलाया फिर छोटे से बच्चे ने अपनी टीशर्ट पर ऑटोग्राफ ले लिया। उनसे ऑटोग्राफ लेने के बाद जब वह बाहर आया तो उन्होंने उस टी-शर्ट को बेचने के लिए आवाज लगनी शुरू दी कि “ऑटोग्राफ वाली टीशर्ट ले लो, ऑटोग्राफ वाली टीशर्ट ले लो” इस पर लोगों ने बोली लगानी चालू कर दी और शुरुआती बोली $200 की थी। इसके बाद बोली बढ़ते बढ़ते $200 से $300 से $400 और अंत में वह $2000 की टी-शर्ट बिक गई ।

यह एक सच्ची कहानी है अमेरिका के एक बहुत बड़े बास्केटबॉल प्लेयर माइकल जॉर्डन की।

इस छोटी सी कहानी में ध्यान देने वाली बात यह थी कि छोटे से बच्चे ने किसी भी Situation में ना नहीं कहा उन्होंने उस चैलेंज को accept किया और सोचा कि क्या किया जा सकता है। उसके बाद उसका सलूशन निकाला। ऐसे ही जिंदगी का हर दिन हमारे लिए एक नए चैलेंज के साथ, एक अवसर, एक मौका लेकर आता है।

Motivational Story 5 – मूर्तिकार और उनका पुत्र रौनक

एक गांव में मूर्तिकार और उसका पुत्र रौनक रहता था। मूर्तिकार मूर्ति बनाने में इतना पारंगत था कि उसकी बनाई हुई मूर्ति में यह बताना मुश्किल हो जाता था कि वह मूर्ति ही है या हकीकत में कोई इंसान खड़ा है। उसने मूर्ति कला में बहुत अच्छा नाम कमा लिया था। अब उसका पुत्र भी मूर्ति बनाने की कला को सीख गया और उसके पुत्र की मूर्तियां बाहर के गांव में भी बिकने लगी परंतु उसका पुत्र मूर्ति बनाने से बाद अपने पिता को दिखाता था और पूछता था कि इसमें कोई कमी तो नहीं है।

एक अच्छा मूर्तिकार होने की वजह से पिता उसे बता देते कि इसमें यह कमी है और वह उसे ठीक कर लेता था। ऐसे ही चलता रहा और लोगों को भी रौनक की बनी मूर्तियां बहुत पसंद आने लगी। जिससे वह हाथो हाथ बिक जाती थी। धीरे धीरे रौनक को इस बात का घमंड होने लगा। वह जब भी मूर्ति बनाता और जब अपने पिता से पूछता तो पिता उसमें थोड़ी बहुत कमी बता देते और रौनक उसे सुधार लेता। पर कुछ टाइम बाद रौनक को अपने पिता की यह बात बुरी लगने लगी। एक दिन उसने अपने पिता से बोल ही दिया कि पिताजी आपकी खुद की मूर्तियां तो इतनी अच्छी बनती नहीं है और आप मेरी मूर्तियों में कमी बताते रहते हो शायद आप मुझसे जलते हैं।

यह बात सुनकर उसके पिता को बहुत दुख हुआ और उसके पिताजी ने कहा कि आज के बाद मैं तेरी मूर्तियों में कमी नहीं निकालूंगा और वह चला गया। रौनक ऐसे ही मूर्तियां बनाता रहा। कुछ टाइम तक तो मूर्तियां अच्छी खासी बिकी परंतु धीरे-धीरे वह बिगड़ती चली गई। लोग उसकी मूर्तियों को नापसंद करने लग गए और बुराई करने लग गए। यह सब देख रौनक को बहुत दुख हुआ और फिर उसने अपने पिता से इस बारे में बात की। उसके पिता ने उसको समझाया कि कुछ टाइम पहले मैंने भी यही गलती करी थी। यह सुनकर रौनक ने कहा कि आपको पता था कि मैं गलत हूँ। तो आपने मुझे रोका क्यों नहीं ?

उसके पिता ने जवाब दिया क्योंकि तुम अपने घमंड में थे और अगर उस समय में तुम्हे रोकता तो तुम समझते नहीं। इसलिए मैने तुम्हें रोका नहीं और तुम्हे तुम्हारी मर्जी करने दी। यह बात सुनकर दोनों को बहुत दुख हुआ और रौनक ने अपने पिता से क्षमा मांगी। इसके बाद फिर से रौनक के पिता ने उसकी मूर्तियों में कमी बताना चालू कर दिया और रौनक का कारोबार फिर से ठीक ठाक चलने लग गया।

सीख – यह छोटी सी कहानी से हमें सीख मिलती है कि कभी भी अपनी गलतियों पर पर्दा मत डालो। उन गलतियों से सीखो और आगे बढ़ो क्योंकि इंसान गलतियों से ही सीखता है और हमें अपनी गलतियों से सीख कर आगे बढ़ना चाहिए जिससे कि हम नई ऊंचाइयों को छू पाए।

उम्मीद है इन कहानियों से आपने कुछ सीखा होगा। आपको कौन सी कहानी सब से ज़्यादा अच्छी लगी हमें नीचे comment कर के बताना।

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