Moral Story In Hindi-ईमानदार लकड़हारा

ईमानदारी छोटा सा शब्द जिसको साबित करने में सारी जिंदगी कम पड़ जाती है। हर कोई इंसान यही चाहता है कि सामने वाला उसके साथ ईमानदार रहे, उसके साथ कोई धोखा ना करें। पर क्या हम खुद से ईमानदार है ? आप यह सवाल एक बार खुद से पूछ कर देखो, ना जाने कितनी बार हम अपने आप से ही झूठ बोल रहे होते हैं। अपने आप से ही बहाने बना रहे होते हैं और हम यह आशा करते हैं कि सामने वाला हमारे साथ ईमानदार रहे, पर ऐसा कैसे हो सकता है।

किसी के भी साथ इमानदार होने से पहले तो हमें खुद से ईमानदार होना पड़ेगा। आजकल के युग में बच्चे ही मां बाप से झूठ बोल रहे हैं, उनसे कितनी सारी बातें छुपा रहे हैं। एक लड़का अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ईमानदार नहीं है, तो कोई गर्लफ्रेंड अपने बॉयफ्रेंड के साथ ईमानदार नहीं है। एक भाई अपने भाई के साथ ईमानदार नहीं है। तो कोई अपने दोस्तो के साथ ईमानदार नहीं है।

चलो यह तो फिर भी एक दूसरे और आपस दारी की बात है, परंतु कुछ तो ऐसे भी लोग हैं जो अपने देश के साथ ईमानदार नहीं है जैसा कि आजकल आप देख ही रहे हो की chinese apps को chinese products को boycott करा जा रहा है क्योंकि भारत और चीन के बीच युद्ध की स्थिति बनी हुई है परंतु फिर भी कुछ लोग अपने देश की खुफिया जानकारी दूसरे देशों तक भेज रहे हैं। दोस्तों ईमानदारी तो जैसे खत्म सी हो गई है।

हम आपके लिए moral कहानी लेकर आए हैं ।आप इस कहानी को ध्यान से पढ़िए और अपने जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव को लेकर आइए।

बहुत समय पहले की बात है, मोहन नाम का एक लकड़हारा था जो लकड़ियां काटकर अपने परिवार की आजीविका को चलाता था। वह जो भी लकड़ियां जंगल से काटता था, उनको बाजार में बेच देता था। लकड़ियां बेचकर उसको जो पैसे मिलते थे, उससे वह अपने घर में खाने-पीने का खर्च चलाता था।

वह एक बहुत ही सुलझा हुआ व्यक्ति था। ऐसे ही उसकी जिंदगी चल रही थी किंतु एक दिन जब वह लकड़ी काटने के लिए पेड़ पर चढ़ा तो उसकी कुल्हाड़ी हाथ से छूट गई और वह सीधा नदी में जा गिरी। वह बहुत दुखी हो गया और बहुत गहरी सोच में पड़ गया। वह उस पीड़ा को सहन नहीं कर पा रहा था तभी एक व्यक्ति आया जो कि उस नदी के अंदर से निकला था और उन्होंने बोला कि आप क्यों रो रहे हो? तो लकड़हारे ने कहा कि मेरी एकमात्र कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है और नदी में अंदर डूब गई है।

मेरे पास नई कुल्हाड़ी खरीदने के पैसे नहीं है और इसी वजह से मैं चिंतित हो रहा हूं कि मैं अपनी आगे की आजीविका को कैसे चला पाऊंगा। यह सारी बात सुनने के बाद वह व्यक्ति नदी के अंदर गया और एक कुल्हाड़ी निकाल कर लाया, जो पूर्णता सोने की बनी हुई थी और उसने लकड़हारे को कहा कि क्या यह आपकी कुल्हाड़ी है? तो लकड़हारे ने कहा कि “नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है, मेरी कुल्हाड़ी लकड़ी और लोहे की बनी हुई है जिसमें लकड़ी का डंडा है और लोहे की blade है”

इस पर वह व्यक्ति फिर अंदर गया।

इस बार चांदी से बनी कुल्हाड़ी को ले आया और उसने बड़े ही विश्वास के साथ बोला – “यह तो तुम्हारी कुल्हाड़ी होगी” परंतु इस बार भी लकड़हारे ने कहा कि – “नहीं मेरी कुल्हाड़ी लोहे और लकड़ी की बनी हुई है। यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। “

वह व्यक्ति फिर से अंदर गया। इस बार लकड़ी और लोहे की बनी कुल्हाड़ी को बाहर निकाल के ले आया और इस पर लकड़हारा बहुत प्रसन्न हुआ और खुशी से झूम उठा और उसने अपने कुल्हाड़ी को हाथ में पकड़ा और उसको चूम लिया।

उस व्यक्ति ने अपना असली रूप दिखाते हुए कहा कि मैं इस नदी का देवता हूं और मैं तुम्हारी ईमानदारी देखकर बहुत प्रसन्न हुआ हूं। इसलिए मैं तुम्हें यह दोनों सोने और चांदी से बनी कुल्हाड़ी उपहार के रूप में देता हूं और यह सुनकर लकड़हारे ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया और वह अपने घर की तरफ लौट गया।

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो हमें इमानदारी का रास्ता ही चुनना चाहिए।

कई बार हम थोड़े से लालच के लिए बेईमानी का रास्ता चुन लेते हैं। जिस वजह से हमें बहुत बड़ा नुकसान भी हो सकता है और होता भी है। जैसे कि आज की जिंदगी में बहुत से लोग जल्दी कामयाब होने के लिए बहुत उल्टे सीधे shortcut का उपयोग करते हैं जिससे कि वह सोचते हैं कि रातों-रात उनकी किस्मत बदल जाएगी परंतु ऐसा नहीं होता और वह shortcut के चक्कर में किसी भी कार्य को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से नहीं कर पाते हैं। जिस कारण से वह fail हो जाते हैं।

ईमानदारी छोटा सा शब्द जिसको साबित करने में सारी जिंदगी कम पड़ जाती है। बहुत समय पहले की बात है, मोहन नाम का एक लकड़हारा था। … चाहे परिस्थिति कैसी भी हो हमें इमानदारी का रास्ता ही चुनना चाहिए।

हम आपको सिर्फ इतना ही बताना चाहते हैं कि जो आप बेईमानी करके पाओगे। वह ज्यादा लंबे समय तक आपके पास नहीं रहेगा पर जिस चीज को आप पूरी मेहनत निष्ठा और ईमानदारी के जरिए पाओगे वह आपको लंबे समय तक फायदा पहुंचाएगी । इसलिए मेहनत करो ईमानदार बनो और आगे बढ़ो।

ईमानदारी आपकी बातों के साथ-साथ आपके काम में भी दिखनी चाहिए।

अगर आज आप बेईमानी कर रहे हो तो आप बाकी लोगों को यह दिखा रहे हो कि ईमानदारी में कुछ नहीं रखा है और इसी सोच से ना जाने कितने ही अच्छे और मेहनती बच्चों के करियर को खत्म किया है बल्कि उन बच्चों की जिंदगी को भी बदल के रख देते है।

भारत देश में corruption बहुत बड़े level पर है और जब तक देश का नागरिक ईमानदार नहीं बनेगा तब तक देश में corruption को बढ़ावा मिलता रहेगा। हो सकता है आज आपकी स्थिति अच्छी हो तो आप पैसे देकर अपना काम करवा रहे हो परंतु यदि कभी ऐसा समय आया जिस वक्त आपके पास पैसा नहीं हुए तो आपका भी काम नहीं हो पाएगा। तो देश का भविष्य youth के हाथ में है और देश के भविष्य को और देश को आगे बढ़ाने के लिए youth को ईमानदार बनना होगा।

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