बुधवार व्रत विधि व कथा। Budhvaar Vrat vidhi aur Katha.

आज हम आपको बुधवार व्रत विधि व् कथा के बारे में आपको बताएंगे। कथा को ध्यान से पढ़े व ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाए।

बुधवार के व्रत की विधि एवं कथा इस प्रकार से है।
विधि:- ग्रह शांति तथा सर्व सुख की इच्छा रखने वाले को बुधवार को व्रत करना चाहिए। इस व्रत में दिन-रात में एक ही बार भोजन करना चाहिए। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। लोग इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा करते है। इस दिन शुभ कार्यों के लिए यात्रा पर नहीं जाना चाहिए यही कारण है कि बुधवार के दिन विवाहित स्त्री को मायके से विदा नहीं किया जाता।

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कथा :- एक समय एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने के लिए अपनी ससुराल गया। वहाँ पर कुछ दिन रहने के पश्चात सास-ससुर से विदा करने के लिए कहा। किंतु सब ने कहा कि आज बुधवार का दिन है। आज के दिन गमन नहीं करते हैं। वह व्यक्ति किसी प्रकार से न माना और हठधर्मी करके घर के बुधवार के दिन ही पत्नी को विदा कराकर अपने नगर को चल पड़ा।

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राह में उसकी पत्नी को प्यास लगी तो उसने अपने पति से कहा कि – मुझे बहुत जोर से प्यास लगी है। तब वह लोटा लेकर रथ से उतरकर जल लेने को चला गया। जैसे ही वह व्यक्ति पानी लेकर अपनी पत्नी के निकट आया तो वह यह देखकर आश्चर्य चकित रह गया कि ठीक अपनी ही जैसी सूरत तथा वैसी ही वेशभूषा में वह व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ रात में बैठा हुआ है।

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उसे क्रोध में भरकर कहा कि – तू कौन है जो मेरी पत्नी के निकट बैठा हुआ है? दूसरा व्यक्ति बोला – यह मेरी पत्नी है । मैं अभी-अभी ससुराल से विदा कराकर ला रहा हूं। वे दोनों व्यक्ति परस्पर लड़ने लगे। तभी राज्य के सिपाही आकर लोटे वाले व्यक्ति को पकड़ने लगे। स्त्री से पूछा – तुम्हारा असली पति कौन सा है? तब पत्नी शांत ही रही क्योंकि दोनों एक जैसे थे।वह किसे अपना असली पति कहे ?

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वह व्यक्ति ईश्वर से प्रार्थना करता हुए बोला- हे परमेश्वर! यह क्या लीला है कि सच्चा झूठा बन रहा है। तभी आकाशवाणी हुई कि – मूर्ख! आज बुधवार के दिन तुझे गमन नहीं करना चाहिए था। तूने किसी की बात नहीं मानी। यह सब लीला बुधदेव भगवान की है। उस व्यक्ति ने बुधदेव से प्रार्थना की और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। तब बुधदेव जी अंतर्ध्यान हो गए।

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वह अपनी स्त्री को लेकर घर आया तथा बुधवार का व्रत वे दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक करने लगे। जो व्यक्ति इस कथा को श्रवण करता तथा सुनता है उसको बुधवार के दिन यात्रा करने का दोष नहीं लगता है उसको सर्व प्रकार से सुखों की प्राप्ति होती है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद 😊😊

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